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लालच बुरी बला है - Greed is bad - Kids World

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सिम्पुर नामक एक गाँव था. गांव में लोग सभी हसि और मजाक के साथ अपना गुजारा करते. उस गांव मैं एक मगनभाई नाम का इंसान किसानी करके थक गया था उसने थोड़े बहुत पैसे किसानी से कमाकर उसने सोचा क्यों न कुछ वेपार कर लिया जाये. एक दिन वो अपना सारा किसानी का काम करके शहर की ओर निकल पड़ा उसने कुछ सोचा के शहर जाकर कुछ जुगाड़ कर लूंगा दो पैसे अंदर तो वापस आ जाऊंगा. 

वो शहर की ओर जा रहा थातो उसे एक लड़का अपनी ओर आते हुवे दिखा और उससे बोला अरे भाई कुछ काम हो तो दे दो मेरे पास कोई काम नहीं है. मगन ने उसे पुछा क्या आता है तुम्हे जो मैं तुम्हे काम दू. तब वो दूसरा इंसान बोला अरे मगन भाई मैं शहर से आज ही आया हूँ शहेर मैं मुझे काम ज्यादा नहीं मिलता था. मैं वही शहर में एक होटल में खाना बनाया करता था. मुझे खाना बहुत अच्छा बना ना   आता है. तुम्हें भी बनाकर खिला सकता हु.

ये बात सुनकर मगन भाई मन ही मन मुस्कुराये और सोचा कि शहर जाकर पैसे बर्बाद करो उसे  यहां कुछ काम सोच लेता हूँ. इसे खाना बनाना अच्छा आता है तो क्यों न छोटा सा ढाबा खोल दू और इसे थोड़े पैसे देकर काम पे रख लेता हु.ये बात सही है ये सोच कर वो फिर से मुस्कुराये. दूसरा इंसान बोलै है भाई क्या हुवा किस सोच में पड़ गए हो? बच्चों की कहानी

Maganबस कुछ नहीं मैं तो शहर जाकर थोड़े पैसे से काम करना चाहता था पर तूने कहाँ की शहेर मैं कुछ नहीं होता तो मैं भी नहीं जा ता. मैं सोच रहा था कि यहीं पे धब्बा चालू करो और कहना बनाऊ तू मेरे साथ काम करगे तो मैं तुझे महीना 1000 रुपए दूंगा.

उसने अपना नाम बताया मुज. वो बोला ठीक है. शहर से तो अच्छा है. उसने हा करदि और मगन ने अपना ढाबा चालू कर दिया. मुज खाना बनाते और मगन उसे परोसता दोनों हाथ बटाकर ढाबा चलाते दो नो की म्हणत से ढाबा बहुत अच्छा चल रहा था. और दो नो बहुत खुश थे. मगन के ढाबे की वह वह ये सुनकर एक दिन मुज सोच में पड़ गया उसने सोचा की मेरे बरिआन मैं तो कोई बात ही नहीं करता सब मगन की ही बात करते है. रसोड़े मैं पसीने से मैं काम करूं, महेनत मैं करू और वो बस खाना परोसकर वह वह ये लूट रहा है और ज्यादा मुनाफा भी कमा रहा है? कुछ तो ऐसा करो की वो मुझ ज्यादा पैसे दे और मेरी वह वह ये भी हो. 

कुछ दिन ऐसा चलता रहा एक दिन उसे लगा की अब तो कुछ करना ही पड़ेगा. मेरे काम की कोई तारीफ ही नहीं कर रहा. तो उसने खाना धीरे धीरे बनने लगा ग्राहक आकर चिल्लाए तब ही वो रोटी बनाता और डेटा उस से ग्राहक बहुत गुस्से से मगण को बोला ये केसा ढाबा है वख्त पे खाना ही नहीं मिलता ये ढाबा तो वख्त बिगाड़ रहा है हमें और भी काम होते है ये कहकर सारे ग्राहक चले गए.मगन ने मुझ से पूछा. क्या हुवा मुज क्यों ऐसा हो रहा है.

Muj: क्या करूँ मालिक?  अब ग्राहक बढ़ रहे है तो जल्दी कैसे करू जीतना हो तो है वही कर सकता हु.

Magan:कोई बात नहीं. ठीक है तो हम कोई दूसरा भी मदद करने के लिए रख लेते है उसे हम 500 रुपए मैं मदद करने के लिए रखते है. वो तुम्हे खाना बनाने में मदद कर देगा.

Muj: नहीं नहीं मालिक रहने दो अकेला सभाल लूँगा. 

Magan: मन ही मन मैं सोच ने लगा के कुछ तो हुवा है. मुज ऐसे ही क्यों दूसरे को लाने के लिए मन करदिया. थोड़े दिन के बाद उसे लगा की मुझे अब मुज को ज्यादा पैसे देने चाहिए क्योंकि वो खाना भी अच्छा बनता है और बहुत मेहनत भी करता है. 

मगर मुझ को तो वह वह ये पसंद थी और पैसे भी तो उसने फिर से ऐसा काम शुरू कर दिया तो गुस्से में आकर मगन ने उसे काम से निकाल दिया और दूसरे को रख लिया. मुज ने अकेले ढाबा खोला और मगन से ज्यादा वह वह ये लूट न चाहा. उसने बहुत पैसे लगाकर ढाबा चालू किया. कुछ तक उसने ढ़ाबा चलाया और लेकिन पहले खभी कुध का धब्बा नहीं खोला तो उसे चलने में दिक्तत होने लगी.

वो ठीक से ढाबा नहीं चला रहा था और उसे नुकसान भी ज्यादा होने लगा था.अब धीरे धीरे वो कंगाल हो गया और पछताने लगा. उसने ढाबा बंद कर दिया और फिर से बेकार बन गया. दूसरी तरफ मगन धीरे धीरे आगे भड़ता गया और एक ढाबा से दो ढ़ाबे उसने खड़े कर दिए और पुरे गाँव में उसकी वह वह भी होने लगी. और वो बड़ा आदमी भी बन गया.

मुज वापस मगण के पास आया और माफ़ी मांगी और कहाँ मुझे लालच नहीं कर नइ चाहिए थी ज्यादा नाम और पैसे की जितनी मेहनत करता उतना ही आप मुझे देते थे.  मुझे माफ़ कर देना इतना बोल ते ही मगन ने उसे माफ़ कर दिया और 2000 रुपए मैं उसे वापस काम पे रख लिया. अब की बार तो मुज ने अकेले दूसरे ढाबे को सभाल ने लगा और वहां का खाना कुढ़ अकेले बनने लगा पूरी ईमानदारी और लगन से काम कर के मुज ने अपना नाम भी बनाया और पुरे सिम्पुर मैं उसके खाने की तारीफ भी होने लगी अब वो खुश था.

देखा दोस्तों जीवन के अन्दर हमें कितनी भी मुसीबत आये या फिर कोई मन मैं बुरा ख्याल आये हमें खभी अपने ईमान को भूलना नहीं चाहिए. लालच अपनी ईमानदारी पे रखो, लालच मेहनत करने की राखो, लालच काम  करने की राखो पर लालच अपने बारे में लोगो को गलत सलाह दे ऐसी लालच और ऐसे  कमाए पैसे नहीं रखते. लालच बुरी बला है.

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