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जैसी करनी वैसी भरनी- As you sow, so you shall reap

Kids story in Hindi, Best kids story

कुछ साल पुरानी बात है. एक वासिया करके गाव था. उस गांव में दो दोस्त रहते थे एक का नाम  रमेश और दूसरे का नाम सुरेश. दोनों ही बड़े अच्छे दोस्त थे. दोनों पढाई मैं और खेलकूद में भी बहुत अच्छे थे. उनकी दोस्ती पूरे गांव में मशहूर थी. दोनों घर में अकेले रहते और अपना जीवन बिताते. 

एक दिन उनके बाकि दोस्तों ने उनकी दोस्ती तोड़ने के बारे में सोचा और दोना से पहले तो अच्छी दोस्ती की और बहुत अच्छे दोस्त बन गए. रमेश और सुरेश दोनों मिलकर एक दुकान चलाते थे. सुरेश थोड़ा गुसे वाला था और रमेश सुलजा हुवा था. एक दिन किसी बात को लेकर सुरेश ने रमेश को दाट दिया और बोलै तुजे दुकान चलानी ही नहीं आती तू तो नुकसान ही कराएगा. बच्चों की कहानी

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Moral of the story

सुरेश ने प्यार से कहा दोस्त कभी -कभी नुकसान चललेना चाहिए हर बार फायदा नहीं सोचना चाहिए पैसा तो बाद मैं भी कमाया जा सकता है पर इज्जत और प्यार नहीं. ये बात सुरेश को बहुत बुरी लगी पैसा अभी नहीं कमाऊँगा तो कब तू तो ऐसे ही रहना चाहता है गरीब का गरीब मुझे बड़ा आदमी बना है तू रेह गरीब. पुरे दिन दोनों ने बात नहीं की और दुकान से घर चले गए. यहीं बात बाकि दोस्तों का तो अच्छी लगी तो उन्होंने सुरेश के कान भरने शुरू करदिये. पुरे दिन रमेश के बारे में बुरा भला बोलते रहे और ये  सारी बातें सुरेश ने मान ली और दूसरे दिन रमेश सुरेश से मिला और उससे माफ़ी मांगी कहा दोस्त मुझे माफ़ करदे तो सुरेश ने गुस्से में आकर बोला तू है ही ऐसा पहले गलती करता है और बादमें माफ़ी मांगता है नहीं माफ़ करूँगा तुजे. मुझे तुझसे अब दोस्ती ही नहीं रखनी. हम दोनों ये दुकान के दो भाग कर देते है.ये सुनकर रमेश को बहुत बुरा लगा और उसने बहोत संजय के ये फैसला ठीक नहीं है पर सुरेश एक का दो नहीं हुवा और दुकान के दो भाग कर दिए. रमेश ने मना कर दिया वो बोला नहीं सुरेश मुझे भाग नहीं चाहिए तू सब राख ले मैं कहीं काम कर लूँगा. मुझसे गलती हो गई हो तो माफ़ कर देना. सुरेश ने लालच में आकर उसका भाग भी ले लिया. रमेश वहाँ से चला जाता है.

Second part of the story

घर आकर वो सोचता है अपनी दोस्ती के बारे मैं. यहीं दोस्ती थी हमारी, इतने सालों की दोस्ती का य इनाम, यहीं भरोसा था दोस्त का, यहीं था प्यार उसका, क्या कुछ नहीं मेरी दोस्ती का मोल? यहीं सब बातें वो सोच रहा था और उसने ये गाँव छोड़ कर शहर जाने का फैशला किया. ये बात सुरेश को पता चली तो उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ा वो बोला जाने दो उसे जहाँ जाना हो मैं तो यहीं ही पैसा बनाऊँगा. बच्चों की कहानी

Suresh: सुरेश अपनी दुकान मैं आराम से काम करता और पूरा पैसा कुढ़ के पास रख लेता उसके गांव के दोस्तों को मोज मस्ती करवाता और पैसे उडाता. 

Ramesh: रमेश को शहर में एक अच्छी जगह पे नौकरी मिली महीना वो 1500 तक कमा लेता था. वो भी बहुत खुश था पर मन ही मन अपने गांव और सुरेश को याद भी करता था.

एक दिन सुरेश के दोस्त ने सुरेश को अपनी दिकण का बड़ा करने के कुछ तरीके दिए और पैसा की माया रखने वाला सुरेश उस बात को मान गया बात यह थी के वो दुकान का माल ज्यादा भाव में बेचे और मुनाफा कमाए. तेल जैसी चीजों में मिलावट कर,दूध में पानी मिला कर बेच. ये बात सुनकर उसे पहले तो ठीक नहीं लागल लेकिन बात पैसा ज्यादा मिलने की थी तो उसने ये बात मान ली और उसपर काम करने लगा.

कुछ वख्त तक रमेश ने अपनी कम और लगन से कई पैसे कमाए और बचत भी की  अब तो उसकी तन्खा 5000 रुपए महीना हो गई थी. अब तो उसे कोई परेशानी भी नहीं थी. वो कुछ साल यहीं रहना चाहता था.

यहाँ, दूसरे तरफ सुरेश ने गलत तरीके से काम करने शुरू करदिये थे. वो तेल, दूध, चायपत्ती, वगेरे चीजों में मिलावट करने लगा था. एक दिन उस गाँव के एक मासूम बच्चा मिलावट वाली चीजें कहने से बीमार पड़ा और हस्पताल में जाँच की तो पता चला की ये बीमारी मिलावटी वाली चीजें कहने से हुई है. 

बीमारी ज्यादा होने की वजह से वो बच्चा मर जाता है. और उसके पिता बहुत रोते है क्योंकि उन्होंने ही वो तरीका अपने दोस्त सुरेश को दिया था. लेकिन गुसे में आकर सारे गाँव वालों ने सुरेश की दुकान तोड़ दी और पूरा सामान फेंक दिया और उसे गाँव से चले जाने का भी बोल दिया.

रमेश जब वापस गाँव आया तो सीधे अपने दोस्त की दुकान पर मिलने गया उसने सोच अब तो  सुरेश रूठा नहीं होगा, मुझसे मिलकर वो भी बहुत खुश होगा.लेकिन जब वो दुकान पर गया तब वहां दुकान ही नहीं थी बल्कि किसीने वह घर बनाकर कोई रह रहा था.सुरेश का कहीं पता नहीं चला. तब उसने गाँव मैं उसके दोस्तों से मिला तब सारी बातें उसे समाज में आई. उसने कहा देखा हम दूसरों के बारे मैं अबार बुरा सोचते है तो वो ही हमारे साथ हो ता है. तुम्हारी वजह से सुरेश और मैं अलग हुए और देखो तुम्हारी वजह से तुम्हारा बेटा नहीं रहा कभी किसी का बुरा मत सोचो.

ये कहकर उसे सुरेश का पता लेकर वो उसे मिलने चला गया और क्या देखता है जिस दूसरे दोस्त ने उसके कान भरे थे उसी दोस्त की दुकान पे वो काम कर रहा था. ये देख कर उसकी आंखों में आंसू आ गए वो झट से उसे माइन दो-डा  और गले लगा दिया वो गैल लेकर बस रो ही रहा था. ये देखर सुरेश की आँखों में भी आंसू आ गए. वै बोला जेसी करणी वेसी भरनी दोस्त. मुझे माफ़ करदेना मैं तुझे बहुत बुरा भला कहा अरे नहीं दोस्त उसमें तेरी कोई गलती नहीं माफ़ी मत मांग चल हम साथ है  अभी तो फिर से नया कुछ शुरू करेंगे और गाँव मैं इजत वापस लाएंगे.

गांव वालो से बात करके दोनों दोस्त वापस से गाव आये और फिर से नई दुकान से शुरुवात की.

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I am Sunil Patel. I am write some trending and useful stories for you. I am marketing expert and story's writer I am  wrote kids story's in Hindi and English. You like this story's so please share and follow the blogs.

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